बुधवार, 14 जनवरी 2026

तख्तापलट और देशों में उलटफेर के पीछे एकमात्र चेहरा - अमेरिका

तख्तापलट और  देशों में उलटफेर के पीछे एकमात्र चेहरा - अमेरिका । 
        यह पंक्ति विचारणीय और सोचनीय है। गत वर्ष दुनिया ने देखा कि कैसे जेन-जी सड़कों पर उतर आई। धीरे धीरे वह एक आंदोलन का रुप लेता गया। यह आंदोलन क्या वास्तव में उस देश का आंदोलन स्वस्फूर्त आंदोलन माना जा सकता है ? या फिर किसी बाहरी ताकतों द्वारा दी गई हवा की झोंकों के कारण वह आंदोलन जन्म लेती गई। पहले पहल तो यह उस देश का ही स्वस्फूर्त आंदोलन लगता है। लेकिन जब गहराई से अध्ययन करें तो पता चलता है कि इन सबके पीछे अमेरिका और उनका डीपस्टेट जिम्मेदार हैं। जिसे पीछे से मदद करता है यूरोपीय संघ। 
           सबसे पहले नेपाल में यह आंदोलन प्रकाश में आया। कुछ दिनों के आंदोलन के बाद उस देश की सत्ता बदल गई। जिससे पीठ के पीछे रहकर दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने वाले को एक रास्ता मिल गया । जिसमें उनके देश को बिना सैनिक हस्तक्षेप के ही अपने विचारों के अनुकूल सरकार बनती दिखीं। इस कारण उनके काले मंसुबों को एक नया हथियार मिल गया। ऐसे में उस देश के ही लोगों द्वारा अपने ही देश की सरकारी संपत्तियों को नुक्सान पहुंचाकर क्या साबित करना चाहते हैं ? जरा विचारें। 
             फिर हमारे ही एक और पड़ोसी देश बांग्लादेश में एक और जेन जी आंदोलन ने जन्म लिया ।  कहने को तो यह एक जेन जी आंदोलन माना गया। लेकिन यह भी अमेरिका के ही डीपस्टेट का ही रचा गया षड्यंत्र है। धीरे धीरे यह आंदोलन उग्र रूप लेता गया और उस आंदोलन ने उस देश की चुनी हुई सरकार को ही उखाड़ फेका। और फिर वह हुआ जिसकी कल्पना किसी ने नहीं किया था। वहां तथाकथित नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एक सत्तालोभी व्यक्ति वहां के प्रमुख मनोनीत हुआ। उसके नेतृत्व में अल्पसंख्यकों के ऊपर ऐसा अत्याचार  होने लगा जिसके बारे में सोचकर ही घिन आती है। क्या ऐसे लोगों के साथ सटे साठ्यम् समाचरेत् ,जैसा व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए ?  
                    इस आंदोलन के भी पीछे उसी अमेरिका का हाथ है। इसके बाद तो जैसा जेन जी एक वरदान के बदले अभिशाप नज़र आने लगा। वह युवा जो देश का भाग्य बदल सकता था वह अपने ही देश के लिए भस्मासुर साबित होने लगा। उसके पास कुछ करने की ताकत और कला दोनों ही विद्यमान होती है। नहीं होती है तो एक दिशा। उसी दिशा भ्रम का फायदा ऐसे अमीर देश उठाते हैं। 
             बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां तो लगातार अल्पसंख्यक समुदाय पर बिना कारण ही अत्याचार होने लगी। जिसमें भी सबसे ज्यादा अत्याचार तो हिन्दू अल्पसंख्यक समुदाय पर हो रहा है। इसके पीछे कारण भी विश्व भर में एक भी हिन्दू राष्ट्र का न होना। यदि कोई हिन्दू राष्ट्र होता तो वह राष्ट्र उनके हितों के लिए लड़ाई लड़ता। वहां के हिंदू विश्व भर की ताकतों की ओर अपने हितों और प्राणों की रक्षा के लिए आशा भरी निगाहों से देख रही है । लेकिन कहीं भी आशा की किरणें उन्हें नजर नहीं आती हैं। भारत और उनके नेतृत्व के ऊपर उनकी नजरें ज्यादा आशान्वित हैं। 
            संघ परिवार और संत समाज की ओर वे ज्यादा भरोसा रखते हैं। संत समाज के पास धर्म ध्वजा और धर्म गदा (दंड)
        दोनों ही होता है। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री जी भी तो जेन जी में ही आते हैं। उनके पास अपनी दिशा है। वे विवेकवान हैं। युवाओं को सही दिशा भी दे रहे हैं। भारत के युवा पीढ़ी को उनके द्वारा दिखाए जा रहे दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है। 
           एक समय में ऐसा भी नेता था जिसके एक आवाज में देश रुक जाती थी। सरकारें उनके सामने नतमस्तक हो जाती थी। उस नेता का नाम है स्वर्गीय श्री बालासाहेब ठाकरे जी।   उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान या किसी भी अन्य मूल्कों में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर अत्याचार होती है तो मक्का की उड़ान मुंबई से उड़ पायेगी। उस उद्घोष का प्रभाव भी दिखा।  
        ब्रिटैनिका के अनुसार, ठाकरे की राजनीति ने आक्रामक हिंदुत्व और राष्ट्रीय गौरव को मिलाकर एक ऐसा मंच बनाया, जिसने विविध समुदायों को आस्था और आत्मसम्मान के साझा सूत्र में पिरोया। उनकी आवाज ने लाखों लोगों को एकजुट किया, जो एक नई पहचान की तलाश में थे।
        अब अमेरिका और वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अपने कुटिल नीति और षड्यंत्रों  में सफल होने के बाद इतना दुस्साहसी हो गया है कि दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला के राष्ट्रपति को उनके घर से ही उठवा लिया। अब सीधे ही वह ग्रीन लैंड और ईरान जैसे देशों के अलावा उन सभी देशों को धमकाने हुए देखा जा सकता है। उसने जिसकी लाठी उसकी भैंस की कहावत को चरितार्थ करना चालू कर दिया है। 
            भारत में भी उन्होंने षड्यंत्र रचा, यहां भी उनके डीपस्टेट के मोहरे काम कर रहे हैं। यहां भी सत्तालोभी व्यक्तियों और दलों  का एक बड़ा समूह उसी दिशा में काम कर रही है। यहां भी विपक्षी दलों और नेताओं के द्वारा यहां के जेन जी को खुले मंचों से भड़काया जाता है। देश को बहुत ही सावधान रहने की आवश्यकता है। ऐसे षड्यंत्रकारी ताकतों से सावधान रहते हुए हमें अपने युवा पीढ़ी को संस्कारवान  बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। भारत में भी एक वर्ग ऐसा भी है जिसके पीछे सारे लोग गोलबंद हो जाते हैं।
             यह तो अच्छा है कि इस समय हमारे देश में एक बहुत ही अच्छा नेतृत्व विद्यमान है। वह अर्जुन के तरह ही सारे अस्त्र-शस्त्रों  की तोड़ जानते हैं। उनके रथ को सारथी की तरह दिशा देने का काम कर रही है कृष्ण रुपी संघ की नेतृत्व। जो अर्जून के रथ को भटकने नहीं दे रहा है।
             यह हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी का कुशल नेतृत्व ही है कि विपक्षी दलों और विदेशी ताकतों का कुछ दाल नहीं गल रहा है। हम सब राष्ट्रभक्त ताकतों को कुटिल और दुष्ट ताकतों से बचकर रहने की आवश्यकता है। हमें बहुत सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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