बुधवार, 5 नवंबर 2025
दुर्गा सप्तशती पाठ बीज मंत्र सहित
शुक्रवार, 12 सितंबर 2025
खूबसूरत खेतार गाँव और सतधारा मेंं बटी दीहारीन झूंझा
सोमवार, 14 जुलाई 2025
एक अनोखा मुगल कालीन राम चरित मानस
सोमवार, 21 अक्टूबर 2024
क्षत्रिय वंश
चार हुतासन सों भये कुल छत्तिस वंश प्रमाण
भौमवंश से धाकरे टांक नाग उनमान
चौहानी चौबीस बंटि कुल बासठ वंश प्रमाण."
अर्थ:-दस सूर्य वंशीय क्षत्रिय दस चन्द्र वंशीय,बारह ऋषि वंशी एवं चार अग्नि वंशीय कुल छत्तिस क्षत्रिय वंशों का प्रमाण है,बाद में भौमवंश नागवंश क्षत्रियों को सामने करने के बाद जब चौहान वंश चौबीस अलग अलग वंशों में जाने लगा तब क्षत्रियों के बासठ अंशों का पमाण मिलता है।
सूर्य वंश की दस शाखायें:-
१. गहलोत/सिसोदिया २. राठौड ३. बडगूजर/सिकरवार ४. कछवाह ५. दिक्खित ६. गौर ७. गहरवार ८. डोगरा ९.बल्ला १०.वैस
चन्द्र वंश की दस शाखायें:-
१.जादौन२.भाटी३.तोमर४.चन्देल५.छोंकर६.झाला७.सिलार८.वनाफ़र ९.कटोच१०. सोमवंशी
अग्निवंश की चार शाखायें:-
१.चौहान२.सोलंकी३.परिहार ४.पमार.
ऋषिवंश की बारह शाखायें:-
१.सेंगर२.कनपुरिया३.गर्गवंशी(हस्तिनापुर के राजा दुष्यन्त के वंशज)४.दायमा५.गौतम६.अनवार (राजा जनक के वंशज)७.दोनवार८.दहिया(दधीचि ऋषि के वंशज)९.चौपटखम्ब १०.काकन११.शौनक १२.बिसैन
चौहान वंश की चौबीस शाखायें:-
१.हाडा २.खींची ३.सोनीगारा ४.पाविया ५.पुरबिया ६.संचौरा ७.मेलवाल८.शम्भरी ९.निर्वाण १०.मलानी ११.धुरा १२.मडरेवा १३.सनीखेची १४.वारेछा १५.पसेरिया १६.बालेछा १७.रूसिया १८.चांदा१९.निकूम २०.भावर २१.छछेरिया २२.उजवानिया २३.देवडा २४.बनकर.
क्षत्रिय जातियो की सूची
| क्रमांक | नाम | गोत्र | वंश | स्थान और जिला |
|---|---|---|---|---|
| १. | सूर्यवंशी | भारद्वाज, कश्यप | सूर्य | महाराजा राजपूताना झारखंड |
| २. | गहलोत | कश्यप, बैजवापेड | सूर्य | मेवाड़ और पूर्वी जिले |
| ३. | सिसोदिया | कश्यप,बैजवापेड | गहलोत | महाराणा उदयपुर स्टेट |
| ४. | कछवाहा | गौतम,वशिष्ठ,मानव | सूर्य | महाराजा जयपुर |
| ५. | राठौड | गौतम,कश्यप,भारद्वाज,शान्डिल्य,अत्रि | गहरवार | महाराजा जोधपुर ,बीकानेर,किशनगढ़ और पूर्व और मालवा |
| ६. | सोमवंशी | अत्रय | चन्द्र | प्रतापगढ और जिला हरदोई |
| ७. | खेरवावंशी | कश्यप | चन्द्र | राजकरौली राजपूताने में |
| ८. | भाटी | अत्रय | जादौन | महारजा जैसलमेर राजपूताना |
| ९. | जाडेचा | अत्रय | यमवंशी | महाराजा कच्छ भुज |
| १०. | जावत | अत्रय | जादौन | शाखा अवा. कोटला ऊमरगढ आगरा |
| ११. | तोमर | अत्रय, व्याघ्र, गार्गेय | चन्द्र | पाटन के राव तंवरघार जिला ग्वालियर |
| १२. | कटियार | व्याघ्र | तोंवर | धरमपुर का राज और हरदोई |
| १३. | पालीवार | व्याघ्र | चन्द्र | गोरखपुर |
| १४. | सत्पोखरिया | भारद्वाज | राठौड(चाँपावत) | मऊ जिला घोसी, इंदारा |
| १५. | परिहार, वरगाही | कौशल्य, कश्यप | अग्नि | बांदा जिला, रीवा राज्य में बघेलखंड |
| १६. | तखी | कौशल्य | परिहार | पंजाब कांगडा जालंधर जम्मू में |
| १७. | पंवार | वशिष्ठ | अग्नि | मालवा मेवाड धौलपुर पूर्व मे बलिया |
| १८. | सोलंकी | भारद्वाज | अग्नि | राजपूताना मालवा सोरों जिला एटा |
| १९. | चौहान | वत्स | अग्नि | राजपूताना पूर्व और सर्वत्र |
| २०. | हाडा | वत्स | चौहान | कोटा बूंदी और हाडौती देश |
| २१. | खींची | वत्स | चौहान | खींचीवाडा मालवा ग्वालियर |
| २२. | भदौरिया | वत्स | अग्नि | नौगंवां पारना आगरा इटावा गालियर |
| २३. | देवडा | वत्स | चौहान | राजपूताना सिरोही राज |
| २४. | शम्भरी | वत्स | चौहान | नीमराणा रानी का रायपुर पंजाब |
| २५. | बच्छगोत्री | वत्स | चौहान | प्रतापगढ सुल्तानपुर |
| २६. | राजकुमार | वत्स | चौहान | दियरा कुडवार फ़तेहपुर जिला |
| २७. | पवैया | वत्स | चौहान | ग्वालियर |
| २८. | गौर,गौड | भारद्वाज | सूर्य | शिवगढ रायबरेली कानपुर लखनऊ |
| २९. | वैस | भारद्वाज | सूर्य | आजमगढ उन्नाव रायबरेली मैनपुरी पूर्व में |
| ३०. | गहरवार | कश्यप, भारद्वाज | सूर्य | माडा, हरदोई, वनारस, उन्नाव, बांदा पूर्व |
| ३१. | सेंगर | गौतम | ब्रह्मक्षत्रिय | जगम्बनपुर भरेह इटावा जालौन |
| ३२. | कनपुरिया | भारद्वाज | ब्रह्मक्षत्रिय | पूर्व में राजाअवध के जिलों में हैं |
| ३३. | बिसेन | अत्रय,वत्स,भारद्वाज,पाराशर,शान्डिल्य | ब्रह्मक्षत्रिय | गोरखपुर गोंडा प्रतापगढ महराजगंज (निचलौल के उत्तर क्षेत्र के समीप) हैं |
| ३४. | निकुम्भ | वशिष्ठ,भारद्वाज | सूर्य | मऊ गोरखपुर आजमगढ हरदोई जौनपुर |
| ३५. | श्रीनेत | भारद्वाज | निकुम्भ | गाजीपुर बस्ती गोरखपुर |
| ३६. | कटहरिया | वशिष्ठ्याभारद्वाज, | सूर्य | बरेली बंदायूं मुरादाबाद शहाजहांपुर |
| ३७. | वाच्छिल | अत्रयवच्छिल | चन्द्र | मथुरा बुलन्दशहर शाहजहांपुर |
| ३८. | बढगूजर | वशिष्ठ | सूर्य | अनूपशहर एटा अलीगढ मैनपुरी मुरादाबाद हिसार गुडगांव जयपुर |
| ३९. | झाला | मरीच, कश्यप, मार्कण्डे | चन्द्र | धागधरा मेवाड झालावाड कोटा |
| ४०. | गौतम | गौतम | ब्रह्मक्षत्रिय | राजा अर्गल फ़तेहपुर |
| ४१. | रैकवार | भारद्वाज | सूर्य | बहरायच सीतापुर बाराबंकी |
| ४२. | करचुल हैहय | कृष्णात्रेय | चन्द्र | बलिया फ़ैजाबाद अवध |
| ४३. | चन्देल | चान्द्रायन | चन्द्रवंशी | गिद्धौर ,कानपुर, फ़र्रुखाबाद, बुन्देलखंड, पंजाब, गुजरात |
| ४४. | जनवार | कौशल्य | चन्द्रवंशी | बलरामपुर अवध के जिलों में |
| ४५. | बहेलिया | भारद्वाज, | वैस (उप जाति सिसोदिया )की गोद सिसोदिया | रायबरेली बाराबंकी |
| ४६. | दीत्तत | कश्यप | सूर्यवंश की शाखा | उन्नाव, बस्ती, प्रतापगढ, जौनपुर, रायबरेली ,बांदा |
| ४७. | सिलार | शौनिक | चन्द्र | सूरत राजपूतानी |
| ४८. | सिकरवार | भारद्वाज, सांक्रित्यन | बढगूजर | ग्वालियर, आगरा, गाजीपुर और उत्तरप्रदेश में |
| ४९. | सुरवार | गर्ग | सूर्य | कठियावाड में |
| ५०. | सुर्वैया | वशिष्ठ | यदुवंश | काठियावाड |
| ५१. | मोरी | ब्रह्मगौतम | सूर्य | मथुरा ,आगरा ,धौलपुर |
| ५२. | टांक (तत्तक) | शौनिक | नागवंश | मैनपुरी और पंजाब |
| ५३. | गुप्त | गार्ग्य | चन्द्र | अब इस वंश का पता नही है |
| ५४. | कौशिक | कौशिक | चन्द्र | बलिया, आजमगढ, गोरखपुर |
| ५५. | भृगुवंशी | भार्गव | ब्रह्मक्षत्रिय | वनारस, बलिया, आजमगढ, गोरखपुर |
| ५६. | गर्गवंशी | गर्ग | ब्रह्मक्षत्रिय | आजमगढ, नरसिंहपुर सुल्तानपुर,अवध,बस्ती,फैजाबाद |
| ५७. | पडियारिया, | देवल,सांकृतसाम | ब्रह्मक्षत्रिय | राजपूताना |
| ५८. | ननवग | कौशिक | चन्द्र | जौनपुर जिला |
| ५९. | वनाफ़र | पाराशर,कश्यप | चन्द्र | बुन्देलखन्ड बांदा वनारस |
| ६०. | जैसवार | कश्यप | यदुवंशी | मिर्जापुर एटा मैनपुरी |
| ६१. | चौलवंश | भारद्वाज | सूर्य | दक्षिण मद्रास तमिलनाडु कर्नाटक में |
| ६२. | निमवंशी | कश्यप | सूर्य | संयुक्त प्रांत |
| ६३. | वैनवंशी | वैन्य | सोमवंशी | मिर्जापुर |
| ६४. | दाहिमा | गार्गेय | ब्रह्मक्षत्रिय | काठियावाड राजपूताना |
| ६५. | पुण्डीर | कपिल, पुलस्त्य | ब्रह्मक्षत्रिय | पंजाब, गुजरात, रींवा, यू.पी. |
| ६६. | तुलवा | आत्रेय | चन्द्र | राजाविजयनगर |
| ६७. | कटोच | कश्यप | चन्द्र | राजानादौन कोटकांगडा |
| ६८. | चावडा,पंवार,चोहान,वर्तमान कुमावत | वशिष्ठ | पंवार की शाखा | मलवा रतलाम उज्जैन गुजरात मेवाड |
| ६९. | अहवन | वशिष्ठ | चावडा,कुमावत | खेरी हरदोई सीतापुर बारांबंकी |
| ७०. | डौडिया | वशिष्ठ | पंवार शाखा | बुलंदशहर मुरादाबाद बांदा मेवाड गल्वा पंजाब |
| ७१. | गोहिल | बैजबापेण | गहलोत शाखा | काठियावाड |
| ७२. | बुन्देला | कश्यप | गहरवारशाखा | बुन्देलखंड के रजवाडे |
| ७३. | काठी | कश्यप | गहरवारशाखा | काठियावाड झांसी बांदा |
| ७४. | जोहिया | पाराशर | चन्द्र | पंजाब देश मे |
| ७५. | गढावंशी | कांवायन | चन्द्र | गढावाडी के लिंगपट्टम में |
| ७६. | मौखरी | अत्रय | चन्द्र | प्राचीन राजवंश था |
| ७७. | लिच्छिवी | कश्यप | सूर्य | प्राचीन राजवंश था |
| ७८. | बाकाटक | विष्णुवर्धन | सूर्य | अब पता नहीं चलता है |
| ७९. | पाल | कश्यप | सूर्य | यह वंश सम्पूर्ण भारत में बिखर गया है |
| ८०. | सैन | अत्रय | ब्रह्मक्षत्रिय | यह वंश भी भारत में बिखर गया है |
| ८१. | कदम्ब | मान्डग्य | ब्रह्मक्षत्रिय | दक्षिण महाराष्ट्र मे हैं |
| ८२. | पोलच | भारद्वाज | ब्रह्मक्षत्रिय | दक्षिण में मराठा के पास में है |
| ८३. | बाणवंश | कश्यप | असुरवंश | श्री लंका और दक्षिण भारत में,कैन्या जावा में |
| ८४. | काकुतीय | भारद्वाज | चन्द्र,प्राचीन सूर्य था | अब पता नही मिलता है |
| ८५. | सुणग वंश | भारद्वाज | चन्द्र,पाचीन सूर्य था, | अब पता नही मिलता है |
| ८६. | दहिया | गौतम | ब्रह्मक्षत्रिय | मारवाड में जोधपुर |
| ८७. | जेठवा | कश्यप | हनुमानवंशी | राजधूमली काठियावाड |
| ८८. | मोहिल | वत्स | चौहान शाखा | महाराष्ट्र मे है |
| ८९. | बल्ला | भारद्वाज,कश्यप | सूर्य | काठियावाड मे मिलते हैं |
| ९०. | डाबी | वशिष्ठ | यदुवंश | राजस्थान |
| ९१. | खरवड | वशिष्ठ | यदुवंश | मेवाड उदयपुर |
| ९२. | सुकेत | भारद्वाज | गौड की शाखा | पंजाब में पहाडी राजा |
| ९३. | पांड्य | अत्रय | चन्द | अब इस वंश का पता नहीं |
| ९४. | पठानिया | पाराशर | वनाफ़रशाखा | पठानकोट राजा पंजाब |
| ९५. | बमटेला | शांडल्य | विसेन शाखा | हरदोई फ़र्रुखाबाद |
| ९६. | बारहगैया | वत्स | चौहान | गाजीपुर |
| ९७. | भैंसोलिया | वत्स | चौहान | भैंसोल गाग सुल्तानपुर |
| ९८. | चन्दोसिया | भारद्वाज | वैस | सुल्तानपुर |
| ९९. | चौपटखम्ब | कश्यप | ब्रह्मक्षत्रिय | जौनपुर |
| १००. | धाकरे | भारद्वाज(भृगु) | ब्रह्मक्षत्रिय | आगरा मथुरा मैनपुरी इटावा हरदोई बुलन्दशहर |
| १०१. | धन्वस्त | यमदाग्नि | ब्रह्मक्षत्रिय | जौनपुर आजमगढ वनारस |
| १०२. | धेकाहा | कश्यप | पंवार की शाखा | भोजपुर शाहाबाद |
| १०३. | दोबर(दोनवार) | वत्स या कश्यप | ब्रह्मक्षत्रिय | गाजीपुर बलिया आजमगढ गोरखपुर |
| १०४. | हरद्वार | भार्गव | चन्द्र शाखा | आजमगढ |
| १०५. | जायस | कश्यप | राठौड की शाखा | रायबरेली मथुरा |
| १०६. | जरोलिया | व्याघ्रपद | चन्द्र | बुलन्दशहर |
| १०७. | जसावत | मानव्य | कछवाह शाखा | मथुरा आगरा |
| १०८. | जोतियाना(भुटियाना) | मानव्य | कश्यप,कछवाह शाखा | मुजफ़्फ़रनगर मेरठ |
| १०९. | घोडेवाहा | मानव्य | कछवाह शाखा | लुधियाना होशियारपुर जालन्धर |
| ११०. | कछनिया | शान्डिल्य | ब्रह्मक्षत्रिय | अवध के जिलों में |
| १११. | काकन | भृगु | ब्रह्मक्षत्रिय | गाजीपुर आजमगढ |
| ११२. | कासिब | कश्यप | कछवाह शाखा | शाहजहांपुर |
| ११३. | किनवार | कश्यप | सेंगर की शाखा | पूर्व बंगाल और बिहार में |
| ११४. | बरहिया | गौतम | सेंगर की शाखा | पूर्व बंगाल और बिहार |
| ११५. | लौतमिया | भारद्वाज | बढगूजर शाखा | बलिया गाजी पुर शाहाबाद |
| ११६. | मौनस | मौन | कछवाह शाखा | मिर्जापुर प्रयाग जौनपुर |
| ११७. | नगबक | मानव्य | कछवाह शाखा | जौनपुर आजमगढ मिर्जापुर |
| ११८. | पलवार | व्याघ्र | सोमवंशी शाखा | आजमगढ फ़ैजाबाद गोरखपुर |
| ११९. | रायजादे | पाराशर | चन्द्र की शाखा | पूर्व अवध में |
| १२०. | सिंहेल | कश्यप | सूर्य | आजमगढ परगना मोहम्दाबाद |
| १२१. | तरकड | कश्यप | दिक्खित शाखा | आगरा मथुरा |
| १२२. | तिसहिया | कौशल्य | परिहार | इलाहाबाद परगना हंडिया |
| १२३. | तिरोता | कश्यप | तंवर की शाखा | आरा शाहाबाद भोजपुर |
| १२४. | उदमतिया | वत्स | ब्रह्मक्षत्रिय | आजमगढ गोरखपुर |
| १२५. | भाले | वशिष्ठ | पंवार | अलीगढ |
| १२६. | भालेसुल्तान | भारद्वाज | वैस की शाखा | रायबरेली लखनऊ उन्नाव |
| १२७. | जैवार | व्याघ्र | तंवर की शाखा | दतिया झांसी बुन्देलखंड |
| १२८. | सरगैयां | व्याघ्र | सोमवंश | हमीरपुर बुन्देलखण्ड |
| १२९. | किसनातिल | अत्रय | तोमरशाखा | दतिया बुन्देलखंड |
| १३०. | टडैया | भारद्वाज | सोलंकीशाखा | झांसी ललितपुर बुन्देलखंड |
| १३१. | खागर | अत्रय | यदुवंश शाखा | जालौन हमीरपुर झांसी |
| १३२. | पिपरिया | भारद्वाज | गौडों की शाखा | बुन्देलखंड |
| १३३. | सिरसवार | अत्रय | चन्द्र शाखा | बुन्देलखंड |
| १३४. | खींचर | वत्स | चौहान शाखा | फ़तेहपुर में असौंथड राज्य |
| १३५. | खाती | कश्यप | दिक्खित शाखा | बुन्देलखंड,राजस्थान में कम संख्या होने के कारण इन्हे बढई गिना जाने लगा |
| १३६. | आहडिया | बैजवापेण | गहलोत | आजमगढ |
| १३७. | उदावत | गौतम | राठौड | पाली |
| १३८. | उजैने | श्रवण | पंवार | आरा डुमरिया |
| १३९. | अमेठिया | भारद्वाज | गौड | अमेठी लखनऊ सीतापुर |
| १४०. | दुर्गवंशी | कश्यप | दिक्खित | राजा जौनपुर राजाबाजार |
| १४१. | बिलखरिया | कश्यप | दिक्खित | प्रतापगढ उमरी राजा |
| १४२. | डोगरा | कश्यप | सूर्य | कश्मीर राज्य और बलिया |
| १४३. | निर्वाण | वत्स | चौहान | राजपूताना (राजस्थान) |
| १४४. | जाटू | व्याघ्र | तोमर | राजस्थान,हिसार पंजाब |
| १४५. | नरौनी | मानव्य | कछवाहा | बलिया आरा |
| १४६. | भनवग | भारद्वाज | कनपुरिया | जौनपुर |
| १४७. | गिदवरिया | वशिष्ठ | पंवार | बिहार मुंगेर भागलपुर |
| १४८. | रक्षेल | कश्यप | सूर्य | रीवा राज्य में बघेलखंड |
| १४९. | कटारिया | भारद्वाज | सोलंकी | झांसी मालवा बुन्देलखंड |
| १५०. | रजवार | वत्स | चौहान | पूर्व मे बुन्देलखंड |
| १५१. | द्वार | व्याघ्र | तोमर | जालौन झांसी हमीरपुर |
| १५२. | इन्दौरिया | व्याघ्र | तोमर | आगरा मथुरा बुलन्दशहर |
| १५३. | छोकर | अत्रय | यदुवंश | अलीगढ मथुरा बुलन्दशहर |
| १५४. | जांगडा | वत्स | चौहान | बुलन्दशहर पूर्व में झांसी |
| १५५. | शौनक | शौन | भ्रृगुवंशी | इलाहाबाद |
| १५६. | बघेल | कश्यप या भारद्वाज | सोलंकी | रीवा राज्य में बघेलखंड |
| १५७. | दिक्खित | कश्यप | सूर्य | बुन्देलखंड |
| १५८. | बंधलगोती | भारद्वाज | ब्रह्मक्षत्रिय | अमेठी,सुल्तानपुर |
| १५९. | कलहंस | अंगिरस | परिहार | प्रतापगढ,बहरायच,गोरखपुर,बस्ती |
| १६०. | बेरुआर | भारद्वाज | तोमर | बलिया,आजमगढ,मऊ |
सोमवार, 6 मई 2024
मल्हार वासिनी माँ मल्लिका( माँ डिडिनेश्वरी)
रविवार, 21 अप्रैल 2024
मर्यादित जीवन ही श्रेष्ठता का पर्याय बन सकता है।
शादी और अन्य उत्सव क्या सादगी से नहीं हो सकती है ?
इससे फालतू के खर्च बचाए जा सकते हैं। साथ ही रीति-रिवाजों को भी मजबूत बनाया जा सकता है। जब हम छोटे थे। अपने मामा गांव सेमरताल जाते थे। तब वहां सब रिस्तेदार होते थे। कोई मेहमान नहीं। जो भी विभिन्न उत्सवों में पहुंचते थे वे सब अपने इच्छानुसार कामों में व्यस्त हो जाते जाते थे। काम करने में मजा आता था। काम करते हुए हंसी-मजाक भी होता। लड़ाइयां भी ।पर थोड़ी देर बाद सब फिर मिल जाते। गहरे लगाव और जुड़ाव होता। तीजा-पोला हो या शादी या कुछ और उस स्नेह मिलन की बात ही अलग होती। वहां कोई मोहब्बत का दुकान नहीं होता। दुकान में तो व्यापार होता है। उसमें स्नेह और दुलार कहां? ममता कहां? बहुत बार सोचता हूॅं कि इस विषय पर लिखना चाहिए।
आजकल फिल्मों की नकल करते करते हम फूहड़ता पर उतर आए हैं । ओंछी हरकतों को नजर अंदाज़ करने लगे हैं। इन सबका दोषी कौन? समाज कहाॅं गिर रहा है? और कहाॅं तक गिरती जायेगी? पैसेवालों के लिए यह शान की बातें हो सकती है परन्तु जरा विचारें उन लोगों का क्या जो सम्मान तो रखते हैं परन्तु उनके पास दिखावे के लिए अनैतिक लक्ष्मी नहीं। दो समय का भोजन ही कठिनाई से ही एकत्र कर पाते हैं।
हम सब अपने बच्चों की उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं। दिखावे के लिए जो लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं । अगर हम थोड़ी समझदारी से काम लें तो उस राशि को अपने बच्चों की बैंक एकाउंट में जमा कर सकते हैं। समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं तो किसी निर्धन कन्या के विवाह में सहयोग कर सकते हैं। समाज किसी की गरीबी का मज़ाक़ न बनाएं। और अमीरी का नंगा नाच भी न दिखाएं। अगर हमारे पास ज्यादा संपत्ति है तो जनकल्याणकारी योजनाओं में उन्हें लगाएं। यह सनातन धर्म है जहां कर्मों कि लेखा-जोखा रखा जाता है। वही हमारे साथ जाता है। बांकि यहीं शेष रह जाता है।
फिर इसे कोई रुढ़िवादी कहे या कुछ और समाज को सम्मान की समानता के लिए कुछ करना चाहिए। ऐसा मेरा विचार है। कुछ चीजें हम सब मिलकर कर सकते हैं । जैसे -
🌹 कोई प्री वैडिंग शूट नहीं होना चाहिए
🌹 दुल्हन शादी में लहंगे की बजाय साड़ी पहनना चाहिए।
🌹 मैरिज लॉन में ऊलजुलूल अश्लील कानफोड़ू संगीत की बजाय हल्का इंस्ट्रूमेंटल संगीत बजना चाहिए।
🌹 वरमाला के समय केवल दूल्हा दुल्हन ही स्टेज पर रहना चाहिए।
🌹 वरमाला के समय दूल्हे या दुल्हन को उठाकर उचकाने वालों को विवाह से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।
🌹 पंडितजी द्वारा विवाह प्रक्रिया शुरू कर देने के बाद कोई उन्हें रोके टोके नहीं।
🌹 कैमरामैन को फेरों आदि के चित्र दूर से लेना चाहिए न कि बार-बार पंडितजी को टोकना चाहिए। वे देवताओं का आह्वान करके उनके साक्ष्य में विवाह सम्पन्न कराते हैं,न कि वह किसी फिल्म की शूटिंग कराते हैं। ऐसे कृत्यों से आवाहित देवगण नाराज होते हैं। नतीजा विवाह के बाद ऐसे जोड़ें और उनके परिवार अनेक प्रकार की विपत्ति में फंस जाते हैं। फिर अनेक प्रकार के दोषारोपण एक दूसरे पर करते हैं। और विवाह विच्छेद तक की स्थिति बन जाती है। आजकल तो अधिकांश जोड़ों को तो संतान तक की समस्या से जूझना पड़ता है।
🌹 दूल्हा दुल्हन के द्वारा कैमरामैन के कहने पर उल्टे सीधे पोज नहीं बनाना चाहिए।
🌹 विवाह समारोह दिन में हो और शाम तक विदाई संपन्न हो जाना चाहिए।जिससे किसी भी मेहमानों को रात 12 से 1 बजे खाना खाने से होने वाली समस्या जैसे अनिद्रा, एसिडिटी आदि से परेशान न होना पड़े।
इसके अतिरिक्त मेहमानों को अपने घर पहुंचने में मध्य रात्रि तक का समय न लगे और असुविधा न हो।
🌹 नवविवाहित को सबके सामने.. आलिंगन के लिये कहने वाले को तुरंत विवाह से निष्कासित कर दिया जाना चाहिए।
🌹 विवाह में किसी प्रकार का मांस मदिरा वर्जित होना चाहिए, विवाह में देवी देवताओं का आवाह्न किया जाता है, मांस मदिरा देखकर देवी देवता रूष्ट होकर दूल्हे दुल्हन को बिना आशीर्वाद दिये ही चले जाते हैं।
समाज सुधार करने के लिये सुंदर सुझाव हो सकता है
सभी के लिये अनुकरणीय भी !!
ऐसे ही हमें अन्य रीति-रिवाजों पर भी कार्य करना चाहिए
🙏🏻शादी एक पवित्र बंधन है.. और रीति-रिवाज को निभाने में मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।🙏🏻
अपनी पुरानी परंपरा ही ठीक है.....दिखावे से बचें।
सनातन धर्म की जय हो।
जय श्री राम 🚩